Thursday, September 10, 2020

84 गंगा स्नान

 

‘‘सभी लोग अपने अपने टिकिट चैक करा लें’’

चलती ट्रेन में टीटीई ने जोर से कहा और चेकिंग शुरुकर दी। टिकिट चेक करते हुए कुछ देर के बाद एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति के पास पहुंच कर उससे पूछा, 

‘‘आपका टिकिट?’’

‘‘गंगा स्नान के लिये जा रहे हैं, टिकिट की क्या जरूरत?’’

‘‘अरे दादाजी! ट्रेन में यात्रा करते हुए चाहे गंगा स्नान करने जाओ या अपने किसी अन्य काम से टिकिट तो लेना ही पड़ता है, बिना टिकिट यात्रा करने का पाप अपने ऊपर व्यर्थ क्यों लेतेे हो?’’

‘‘ हमारी गंगा मैया सब पाप धो देंगी’’

‘‘ तो क्या गंगा मैया पाप धो देगीं इसलिये जितने चाहो पाप करते जाना चाहिये?’’ 

‘‘तुम लोगों को शास्त्र का ज्ञान ही नहीं है, उनमें कहा गया है कि गंगा मैया की पाप धोने की इतनी अधिक शक्ति है कि मनुष्य के पास पाप करने की उतनी शक्ति ही नहीं है, वह उतनें पाप नहीं कर सकता कि गंगा मैया की धोने की ताकत से अधिक हो जायें’’

‘‘दादाजी! आपके इस तर्क को तो शायद चीफ जस्टिस भी नहीं ठुकरा सकते, परंतु फिल हाल आप चालीस रुपये किराये के और चालीस रुपये फाइन के देकर रसीद ले लीजिये अन्यथा अगले स्टेषन पर आपको हम जीआरपी के हवाले कर देंगे, अपने शास्त्रों के ज्ञान का वहीं बखान करना।’’


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