‘‘ क्यों राजपूत साब! आज तो बड़े निश्चिन्त बैठे हो! आफिस नहीं जाना क्या?’’
‘‘हाॅ’’
‘‘ पर क्यों? पेपर में तो न्यूज है कि आज तुम्हारे नये डीडी ज्वाइन कर रहे हैं। क्या इसीलिये निश्चिंत हो कि अब डीडी के प्रभार से मुक्त हो जाओगे?’’
‘‘ हाॅं, यही बात है’’
‘‘ कोई ‘ एन. लाल साहब’ का नाम लिखा है पेपर में’’
‘‘हाॅं, आफिस में तो आर्डर कई दिन पहले आ गया था। ये वही ‘नन्हेंलाल’ है जो कभी हमारा असिस्टेंट हुआ करता था, अब ‘लाल साहब‘ कहलाता है’’
‘‘ अरे वही नन्हेंलाल! जिसे रोज डाॅंटते थे, समझाते थे फिर भी कुछ न कुछ गलती कर ही देता था’’
‘‘ बिलकुल सही समझा, कभी मेरे सामने घुटनाटेक रहने वाला नन्हेंलाल अब डीडी के सिंहासन पर बैठकर मुझे असिस्टेंट की तरह काम करने का आदेश देगा! इसीलिये मैंने वालंटरी रिटायरमेंट ले लिया है, अब कोई और दूसरा काम धंधा करेंगे, आज से आफिस का चक्कर ही खत्म।’’
‘‘ लेकिन वह तो तुम से बहुत जूनियर है, तुम्हारा अफसर कैसे हो गया?’’
‘‘ हम अपने पूर्वजों के कर्मों का फल भोग रहे हैं जिनके कारण उसे सरकार का आरक्षण और संरक्षण दोनों प्राप्त हैं , इसलिये।’’
‘‘ यह तो.... ?’’
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