Thursday, September 10, 2020

86 सबसिडी

"‘क्यों वर्मा जी! फोन पर किसे इस तरह डाॅंट रहे हो? जीने दो बेचारे को?’’

‘‘ कुछ नहीं शर्मा जी! ये गैस डिस्ट्रीव्यूट करने वाले एजेंट इतने बदमाश हो गये हैं कि कुछ न पूछो, दो सप्ताह हो गये हैं पेमेंट किये हुए, पर अभी तक सबसिडी की रकम खाते में ट्राॅंसफर नहीं की।’’

‘‘अच्छा ! ये बात है, मैंने तो प्रधानमंत्री जी की इस अपील पर कि किसी गरीब का चूल्हा जल सके, अपनी सबसिडी लेना छोड़ ही दी।’’

‘‘ हाॅं ठीक कहा , इस अपील पर देश के साठ प्रतिशत से अधिक मध्यमवर्ग के परिवारों ने ही गैस पर सबसिडी लेना बंद किया है बड़े बड़े नेताओं और धनाड्यों ने तो अपील को सुना भी नहीं है।’’

‘‘ क्या कहते हो वर्माजी ! पेपर में तो कुछ मंत्रियों और विधायकों के नाम तक छपे थे जिन्होंने सबसिडी को छोड़ दिया है।’’

‘‘अरे शर्माजी! मैं ने अपनी नौकरी के आधे से अधिक समय को इन मंत्रियों और विधायकों के आफिस असिस्टेंट के रुप में काम करते हुए बिताया है, मैं इन्हें अच्छी तरह जानता हॅूं जनता द्वारा दिये गये टैक्स पर ऐश करने वाले इन चोरों को। ये अपने नाम के सिलिंडर पर सबसिडी छोड़कर धर्मात्मा बनने का ड्रामा करते हैं और चैकीदार, माली, रसोइया, हरवाहों , कुत्ते, बिल्ली आदि के नाम पर लिये गये दस दस सिलिंडरों पर सबसिडी लेते हैं।’’


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