Wednesday, September 9, 2020

 81 संकल्प

  ‘‘ अभी तक जितनी लड़कियाॅं देखीं हैं उनमें से जिसे कल देख कर आये हैं मुझे तो वह सबसे अच्छी व सुंदर लगी, अपने ‘हर्ष’ को भी पसंद आई, दोनों इंजीनियर हैं एक ही कंपनी में काम भी करते हैं, एक सी सेलरी भी है, मैं तो कहती हॅूं आज ही लड़की वालों से आगे की बात कर  षुभ लग्न देखकर विवाह सम्पन्न कर दो, देरी करना उचित नहीं है’’

‘‘ मैं भी यही सोचता हॅूं , यदि ‘हर्ष’ का भी यही विचार है तो फिर मैं बात आगे बढ़ाता हॅूं।’’

‘‘ हेलो, पाॅंडे जी ! मैं त्रिपाठी,  हमें लड़की पसंद है, अब आगे की रूपरेखा के संबंध में बात करना है, यदि आप यहाॅं आ जायें तो अच्छा होगा’’

‘‘ ओहो, नमस्कार त्रिपाठी जी!, मैं आपके आदेष का पालन करने हेतु अभी आपके पास हाजिर होता हॅूं । ... ... ...

‘‘   आइये, आइये पाॅंडे जी! बैठिये। वास्तव में, मैं यह जानना चाह रहा था कि आपका संकल्प क्या है?’’

‘‘ आदरणीय! मेरा संकल्प तो यह है कि भगवान ने मुझे लड़कियाॅं ही दी हैं इसलिये उन्हें लड़कों के समान ही षिक्षित कर आत्मनिर्भर बना दॅूं, बस, धीरे धीरे वही पूरा करता जा रहा  हॅूं।’’

‘‘ अरे पाॅंडे जी! वह तो सभी करते हैं, मैं तो इस विवाह के संबंध में किये गये आपके संकल्प के बारे में पूछ रहा था अर्थात् कितना खर्च करने का विचार है?’’

‘‘आप ही बता दें कि आप कम से कम कितना खर्च करना चाहते हैं’’

‘‘  इस जमाने में दस से पन्द्रह लाख तो साधारण लोग भी खर्च कर देते हैं फिर हमारा स्तर तो,,, आप जानते ही हैं’’

‘‘ महोदय! जहाॅं तक मैं जानता हॅूं, ‘संबंध‘ का अर्थ है ‘सम प्लस बंध‘, अर्थात् दोनों परिवारों की ओर से प्रेम और आकर्षण के एक समान बंधन, इक्वल बाॅडस् आफ लव एन्ड अफेक्षन, इसलिये आप जो भी खर्च निर्धारित करेंगे हम दोनों परिवार बराबर बराबर बाॅंट लेंगे, ठीक है?’’

‘‘ अच्छा, पाॅंडे जी! फिर तो हमें इस विकल्प पर पुनः विचार करना पड़ेगा, नमस्कार!’’


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