Saturday, October 10, 2020

212 चश्मे बहार

कोविड-19 के घातक संक्रमण ने जब संसार के कोने कोने में कहर ढाया तो विदेश में सेवारत अपने इकलौते पुत्र से फोन पर उसने कुशलक्षेम पूछी। सकुशल होने की सूचना पाकर मानो उसे संतोष की सांस लेने का फिर से मौका मिल गया। अगले दिन फिरसे उसने वहाॅं के अपडेट लेने, फोन किया। उत्तर मिला,‘‘पापा! हमने कहा न हम तो ठीेक हैं, बार बार एक ही बात क्यों? आप अपनी फिकर करो’’ और फोन कट गया। दो तीन दिन तक वार्ता बंद रही, आखिर सब्र का बांध तोड़ पितृत्व फिर उमड़ा और मोबाइल उठाने के प्रयास में ‘पेन और कागज’ हाथ आया और झरने लगा वर्षों से दबा झरना-

मेरे वज़ूद पर तुम रह रह कर मुस्कराते हो,

घड़ी घड़ी मुझे इतना क्यों डराते हो।

 

किसी ने खून पसीने की रोशनाई से लिखा पहला हरुफ,

फिर लिखे लफ्ज, सफहे, सफहे से किताब बने,

पन्ने पन्ने बिखर जाओगे आंधियों के मौसम में,

जिल्द पे लिखे नाम को यूं क्यूं मिटाते हो।

      

बरसात की कागज की कश्ती कभी याद कर लेना,

रात कटती थीं आंखों में वो सिसकी याद कर लेना,

जानता हूं अब समंदर चीरने की कूवत है तुममें,

साहिल पे खड़ी मेरी सफीना क्यों डुबाते हो।

 

बूढ़े हाथों में तुम्हारी अंगुश्त की जुम्बिश है मौजूद,

मेरे दिल के आइने में तुम्हांरा अक्स है महफूज,

मैंने मुस्तकबिल के लिये ख़्वाब बोये कि परवान चढ़ेंगे,  

ख़्वाबों के ताबूत में कीलें क्यूं गड़ाते हो।

 

मैं राहबर था तीरगी में, ताबिश में आबसार था,

संगदिल था नाजुकी में, ख़जां में मौसमे बहार था,

इस गुलशन का जर्रा जर्रा पहचानता है मुझको,

हरे शज़र गुलशन के यूं क्यूं गिराते हो।

 

एहतिशाम की इतनी तश्नगी अच्छी नहीं,

पंख नाजुक हैं, हद से ऊंची परवाज अच्छी नहीं,

तंगदस्ती में भी मेरा वजूद सहरा में चश्मे बहार था

जमाने से यूं मुझको रुसवा क्यूं कराते हो।  

  

(वज़ूद . अस्तित्व। रोशनाई . स्याही। हरुफ़ . अक्षर। लफ़्ज . शब्द। सफ़हे . पन्ने। कूव्वत . सामथ्र्यए ताकत। साहिल . किनारा। सफ़ीना . नाव। अंगुश्त . उंगली। जुम्बिश . कंपन। अक्स . छविए चिन्ह। महफ़ूज़ . सुरक्षित। मुस्तकबिल . भविष्य। परवान चढ़ना .उन्नत होनाए विकसित होना। राहबर . पथप्रदर्शक। तीरगी . अंधकारमयए विपत्ति। ताबिश . गर्मीए तपन। आबसार . झरना। संगदिल . पत्थर समान कठोर दिल। नाजुकी . कोमलता। ख़ज़ां . पतझड़। शज़र . पेढ़। गुलशन . बाग बगीचा। एहतिशाम . ऐश्वर्यए वैभव। तश्नगी . तीव्रध्उत्कट इच्छा। परवाज़ . उड़ान। तंगदस्ती . गरीबीए फटेहाली। सहरा . रेगिस्तान। चश्म.ए.बहार . बहार का सोता। रुसवा . अपमान।)


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